बस इतना सा ही कहना था कि...

बस इतना सा ही कहना था कि...

Love Poetry- dil se nikalti h or dil tak pahuchti h

बस इतना सा ही कहना था कि...
जब बिना वजह ही अकेले में मुस्कुराता हूँ, ज़रा सी फुरसत मिले तो बस तुम में डूब जाता हूँ, जब भी आती हो ज़हन में धड़कनें तेज़ कर देती हो मेरी, तब तब समझ मे आता है....कुछ तो अब भी हो तुम मेरी....

बस इतना सा ही कहना था कि..
जब तुम्हारे उस गुलाबी सूट की लाल सुर्ख पत्तियां याद आती हैं, जब अंधेरे में तुम्हारे हाथों की जलाईं मोमबत्तियां याद आती हैं, जब जब मेरी नब्ज़ फिर से उठने में कर देती है देरी....तब तब समझ मे आता है....कुछ तो अब भी हो तुम मेरी....

बस इतना सा ही कहना था कि..
जब एक बार तुम्हारे लिए नौ दिन व्रत रखे थे, तुम साबूदाने की खिचड़ी ऑफिस लातीं थीं, जब तक मैं न खा लेता तुम भी न खातीं थीं, आज भी साबूदाने की खिचड़ी देख कर मुस्कान होंठो पे आ जाती है मेरी....तब तब समझ मे आता है....कुछ तो अब भी हो तुम मेरी....

बस इतना सा ही कहना था कि..
जब भी कभी तुम मुझे देखा करतीं थीं, मैं नज़रें चुराने लगता था, इधर उधर देखकर शर्म से मुस्कुराने लगता था, आज तेरी तस्वीर से भी जब वही हालत हो जाती है मेरी.....तब तब समझ मे आता है....कुछ तो अब भी हो तुम मेरी....

बस इतना सा ही कहना था कि..
मैं तुम्हारे उस पहली कमाई के दो सौ रुपये वाले कंगन का दीवाना था जिसको पहन कर तुम गर्व से मुस्कुराती थीं, तुम्हारा शुक्रिया कि वही थोड़े से में खुश होने की जादूगरी तुमने मुझे सिखाई है

हाँ और एक बात....मुझे तुम्हारी वो बहुत छोटे डायल की घड़ी याद है जो तुम कलाई पर हथेली की तरफ से बाँधा करती थीं, मेरा वक़्त ठहरा लिया है तुमने अपनी उस कलाई पर, कभी तुमको वक़्त मिले तो उसे आज़ाद कर देना...


             बस इतना सा ही कहना था तुमसे......



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