इश्क़ में जब भी बिछड़ने की घड़ी होती है,

इश्क़ में जब भी बिछड़ने की घड़ी होती है,


इश्क़ में जब भी बिछड़ने की घड़ी होती है,
ज़िन्दगी मौत की चौखट पे खड़ी होती है.
..
उसको आसानी से बदला भी नहीं जा सकता,
यार बुनियाद में जो चीज़ गड़ी होती है.
..
कच्ची मिट्टी से बनाई हुई दीवार है इश्क़,
ये इमारत बड़ी मुश्किल से खड़ी होती है.
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कौन बाज़ार में रुकता है किसी की ख़ातिर,
सब को घर लौट के जाने की पड़ी होती है.
..
क्या ज़ुरूरी है बड़े ख़्वाब ही देखे जाएं,
छोटे ख़्वाबों की भी ताबीर बड़ी होती है.
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तू नहीं है तो कोई चीज़ ठिकाने पे नहीं,
ढूढंता फिरता हूँ और घर मे पड़ी होती है .
..

इश्क़ में जब भी बिछड़ने की घड़ी होती है,

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